दया करो माँ अम्बे भवानी
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मेरी बुद्धि का पट खोलो
सही - गलत पर हमको बोलो
आत्मबोध करवा दो हमको
मैं मुर्खा बन जाऊँ सयानी
दया करो माँ......................
बार - बार मन भटक रहा है
ध्यान टूटकर चटक रहा है
मन साधित कर हमको दो वर
कि मन कर न सके मनमानी
दया करो माँ.....................
श्रद्धा सुमन चढ़ाऊँगी मैं
भक्ति दीप जलाऊँगी मैं
मेरे अन्तः को कर उज्ज्वल
हे माता कल्याणी
दया करो माँ...…................
जीवन पथ पर है अंधियारा
डरता रहता मन बेचारा
राह दिखाओ हमें हमारा
हमपर रख निगरानी
दया करो माँ....................
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किरण सिंह