Friday, 18 April 2014

अर्चना

विकल हृदय चंचल मति मेरी
अर्चना कैसे हो ..........पूरी
कामनाओ के वश में मन लोभी को
साधनाओ से भर दो माँ
तृप्त हृदय को कर दो माँ

तुम तो जननी की जननी हो
सकल दुखो की तुम हरणी हो
अपने दिव्य ज्योति से मन को
ज्योतिर्मय कर दो माँ
तृप्त हृदय को कर दो माँ

सब संकट को दूर करो माँ
मनोकामना पूर्ण करो माँ
सब क्लेशो को हरकर विश्व में
शांति स्थापना कर दो माँ
तृप्त हृदय को कर दो माँ ...............किरण सिंह

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