Sunday, 30 August 2015

मैं बावरी

मैं बावरी जोगन बन गई
पिया तुम्हारी प्रीत में

सुध-बुध अपना खो गई मैं
मन से तेरी हो गई मैं
हार कर भी दिल अपना मैं
खुश हूँ तेरी जीत में
मैं बावरी जोगन.................

पल भर भी तुझे भूल न पाऊँ
बोलो प्रीतम क्या मैं गाऊँ
जब भी लिखती छन्द में ढलकर
आ जाते हो गीत में
मैं बावरी जोगन...................

कहीं भी तुझ बिन जी नहीं लागे
कैसे हैं ये प्रेम के धागे
बांध लिये हमें जाने कैसे
छल गई मैं इस रीत में
मैं बावरी जोगन......................

हर तरफ़ दिखता तू ही है
कहीं ईश तू ही तो नहीं है
हर धड़कन में तू ही झंकृत
मेरे हर संगीत में
मैं वैरागन जोगन....................

©किरण सिंह

Tuesday, 25 August 2015

तुम अपना धीरज मत खोना


तुम अपना धीरज मत खोना
समस्याएँ आएँगी.. ही
लौट पुनः वो जाएँगी भी
घबरा कर जीवन पथ में तुम विचलित मत होना
तुम अपना धीरज मत खोना

कोशिश तो करते रहना है
लक्ष्य दूर भले कितना .है
प्रारंभिक असफलताओं से कभी हताश  मत होना
तुम अपना धीरज मत खोना

पथ में चलते रहो ..निरन्तर
जितना भी हो सके यत्न कर
काँटे छलनी किए पांव तो साहस खो मत रोना
तुम अपना धीरज मत खोना

समय एक सा नहीं रहता है
उसकी नियति में चलना है
लौटेगा जब काल चक्र तुम खुशियों के पुष्प पिरोना
तुम अपना धीरज मत खोना
……………………………
© किरण सिंह