फिर आओ नन्दलाल धरा पर
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फिर आओ नन्दलाल धरा पर
लेकर नव अवतार
फैल गया है इस धरती पर
फिर से अत्याचार
राह निहारे यशुमति मैया
सूना है घर आंगन
मटकी दधि से भरी हुई है
आओ खाने माखन
प्रतीक्षारत राधा रानी
बैठीं पलक बिछाये
छेड़ो मुरली तुम मधुवन में
हम सब नाचे गायें
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किरण सिंह
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