Wednesday, 26 July 2017

अरे रामा अंगना में

अरे रामा अंगना में
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अरे रामा अंगना में बरसे बदरिया
भीजेके करे मनवा ए हरी

आइल बरखा नाचत गावत
छनन छनन जइसे घूंघरू बजावत
अरे रामा पूरब से बहे पूरवइया
भीजेके करे...........................

धानी चूनरिया सइयाँ ले अइले
चूड़ी कंगन सेट मिलइले
अरे रामा पहनूँ त चूवे पसीनवा
भीजेके करे........................

लुका छुपी खेले चंदा तारा
कबो अन्हार कबो उजियारा
अरे रामा धीरे से चमके बिजुरिया
भीजेके करे..........................

घरवा में जीयरा घबराये
कड़क कड़क बिजुरी डेरवाये
चल सइयाँ अंगना बिछाव खटोलवा
भीजेके करे...............................

©किरण सिंह

Monday, 17 July 2017

जीत की हार

जीत की हार
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प्रेम बारीक धागा है
एहसासों का
जो
उलझ कर हृदय में
फँस जाता है
कभी-कभी
तब
करता है मस्तिष्क
बार बार
सुलझाने की कोशिश
प्रेम के धागों को
और खुद भी उलझ जाता है
सुलझाने के क्रम में
मस्तिष्क
कोशिश भी करता है
तोड़ने की
और
पा लेता है कामयाबी भी
हो जाता है विजयी
किन्तु
अपराध बोध से ग्रसित होने लगता है
व्याघात करती हैं
बार बार
कुंडली मारे सर्प की तरह
स्मृतियाँ
प्रेम की
फिर मस्तिष्क
हो जाता है परेशान
महसूस करता है
खुद को
हारा हुआ
जीतकर भी
छोटे से कोमल
दिल से
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©किरण सिंह