स्वागत है हे नव वर्ष
घने कोहरे को चीर किरण
मन में नव आस जगाई
जीवन के कोहरे भी छट जाएंगे
जग को नित पाठ पढ़ाई
नव पथ पर हम कदम बढ़ाएं
कुछ नए पदचिन्ह बनाएं
जोड़ते चलें नव कदमों को
कदम कदम पर कदम मिलाएं
कटु अनुभूतियों से सीख कर
कुछ याद कर कुछ भूलकर
कुछ परिवर्तन होना ही है
कुछ पाना है कुछ खोकर
बीत गया वो अतीत कहानी
जीवन पथ की रीति पुरानी
नव सर्जन स्वीकार सहर्ष
स्वागत है हे नव वर्ष
***********************
© किरण सिंह
No comments:
Post a Comment