प्रातःकाल सागर दर्पण में देख क्षितिज पर प्रभाकर मुखमंडल का दमक जाना और फिर मन का विवश हो जाना सोंचने पर कि रात्रि प्रहर सूरज विश्राम किया या कहीं मधुरस पी लिया *********** ©किरण सिंह
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