Sunday, 7 June 2015

जाने कैसे

जाने कैसे
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आज के ही दिन
हल्दी के रंगों के साथ
चढ़ गई थी
बेरंग जीवन में मेरे
कई रंग
एकसाथ
जाने कैसे

जाने कैसे
मन की हथेलियों पर
कूट पीसकर
मेहंदी से
उकेर दिए गए थे
फूल पत्तियों के साथ
सिर्फ एक ही
अमिट
नाम
जाने कैसे

जाने कैसे
महसूस
होने लगी थी
पहली बार
सजी धजी सी खास
नई नवेली सी
सिंदूरी शाम
सुनहरी
जाने कैसे

जाने कैसे
वो स्याह रातें
चांदनी की चादर ओढ़कर
चुपके से कहीं से
अनेकों रंग चुरा
लाईं थीं
अपने संग
जाने कैसे
जाने कैसे
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©Copyright Kiran singh

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