Tuesday, 11 October 2016

सुनो प्रियतम

सुनो ना प्रियतम ..............................
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सुनो ना प्रियतम नेह डोर  अब बंध गई तुमसे
प्रीत हॄदय की धड़कनों में ध्वनि छिड़ गई तुमसे

चांद तारे सजी बिंदिया चमके जैसे बिजुरी
पिया मेरी मांग सिंदूरी लाल सज गई तुमसे

शब्द संधि कर छन्द में सज लिखे नई गीत गज़ल
जिंदगी की सुर सरगम संगीत बन गई तुमसे

कंगन  खनक खनक कर  पुकारती हैं तुम्हें पिया
पायल की रूनझुन घुंघरू भी छनक गईं तुमसे

उर आपका प्रेम सागर  डूब न जाएँ कहीं हम
मैं गंगा मिरे लक्ष्य हो तुम मैं मिल गई तुमसे

तुम सूरज मैं किरण पथ पर तेरे संग चली हूँ
जैसे उगे प्रिय तुम गगन में मैं खिल गई तुमसे
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© copyright @ Kiran singh

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