Monday, 27 April 2015

जीवन पथ


जीवन पथ एक अनुभव है
हर पड़ाव परिवर्तन है
लगातार चलते जाना
यही तो कहता जीवन है

लेखक तो लिख देता है
कहां कोई  पढ़ लेता है
कब कहानी पूरी होगी
कौतूहल विजेता है

जीवन एक नदी सी है
चलती सांसे कस्तीसी है
कोई डुबा कोई पार किया
कोई तैराकी गुरु ज्ञान दिया

मन मतवाला मचला ना कर
कठपुतली तू नर्तन आ कर
खींचेगा वो डोर तुम्हारा
करो भरोसा खुद खुदा पर
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© copyright @ Kiran singh

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