आया सावन बहका बहका
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बीत गए दिन रैन तपन .के
आया सावन बहका बहका
झेली बिरहन दिन रैन दोपहरी
अग्नि समीर का झटका
खत्म हो गई कठिन परीक्षा
भीगत तन मन महका
आया सावन.................
आसमान का हृदय पसीजा
अश्रु नयन से छलका
प्रिय के लिए सज गई प्रिया
हरी चूनरी घूंघट लटका
आया सावन...................
देख प्रणय धरती अम्बर का
बदरी का मन चहका
बीच बदरी के झांकते रवि का
मुख मंडल भी दमका
आया सावन........................
रिमझिम बारिश की बूंदो में
भीगी लता संग लतिका
झुक कर धरणी को कर नमन
खुशी से खुशी मिले हैं मन का
आया सावन...................
चली इठलाती पवन पुरवैया
तरु नाचे कमरिया लचका
रुनक झुनुक पायलिया गाए
संग संग कंगन खनका
आया सावन.................
इन्द्रधनुष का छटा सुहाना
सतरंगी रंग ....छलका
हरियाली धरती पर बिखरी
अम्बर का फूटा मटका
आया सावन.......................
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© copyright @ Kiran singh