आज १३ फरवरी.. नहीं भूलता यह दिन शायद यह दिन मेरे लिए पुनर्जन्म का दिन ही है...! वह सुबह करीब ९ बजे स्कार्ट हार्ट हॉस्पिटल की नर्स ने जब स्ट्रेचर पर लिटाया और ऑपरेशन थियेटर की तरफ ले जाने लगी थी तो मुझे लग रहा था कि जल्लाद रुपी परिचारिकाएं मुझे फांसी के तख्ते तक ले जा रही हैं......... हृदय की धड़कने और भी तेजी से धड़क रही थी.... मन ही मन मैं सोंच रही थी शायद यह मेरे जीवन का अन्तिम दिन है..फिर भी परिजन परेशान न हो जाएं इसलिए अपने को बिलकुल निर्भीक दिखाने का लगातार प्रयत्न करती रही थी.. ! आँखों से आँसू कहीं छलक न जाए इसलिए मैं अपने परिजनों की तरफ़ देख भी नहीं रही थी..!
परिचारिकाएं ऑपरेशन थियेटर के दरवाजे के सामने स्ट्रेचर रोक देती हैं.. और तभी किसी यमदूत की तरह डाक्टर आते हैं.. स्ट्रेचर के साथ साथ डॉक्टर भी ऑपरेशन थियेटर में मेरे साथ चल रहे थे.... चलते चलते वे अपनी बातों में उलझाने लगे थे ..जैसे किसी चंचल बच्चे को रोचक कहानी सुनाकर बातों बातों में उलझा लिया जाता है.. !
डाक्टर ने कहा किरण जी लगता है आप बहुत नाराज हैं..! मैने कहा हाँ.. क्यों न होऊं...? और मैं हॉस्पिटल की व्यवस्था को लेकर कुछ कुछ उलाहने.देने लगी थी . तथा इसी प्रकार की कुछ कुछ बातें किये जा रही थी..!
मैने डाक्टर से पूछा बेहोश करके ही ऑपरेशन होगा न..? डाक्टर ने मजाकिया अंदाज में कहा अब मैं आपका होश में ही ऑपरेशन करके आपपर एक नया एक्सपेरिमेंट करता हूँ..! बातों ही बातों में डॉक्टर ने मुझे बेहोशी का इंजेक्शन दे दिया उसके बाद मुझे क्या हुआ कुछ पता नहीं..!
करीब ३६ घंटे बाद मेरी आँखें रुक रुक कर खुल रही थी ..! आँखें खुलते ही सामने पतिदेव को खड़े देखा तब .मुझे विश्वास नहीं हो पा रहा था कि मैं सचमुच जीवित हूँ...!कहीं यह स्वप्न तो नहीं है यह सोचकर मैने अपने पति के तरफ अपना हाँथ बढ़ाया..जब पति ने हांथ पकड़ा तब विश्वास हुआ कि मैं सचमुच जीवित हूँ..! तब मैं भूल गई थी उन सभी शारीरिक और मानसिक तकलीफों को जिन्हे मैंने सर्जरी के पूर्व झेला था ..तब जिन्दगी और भी खूबसूरत लगने लगी थी ..! अपने भाई , बहनों , सहेलियों तथा सभी परिजनों का स्नेह.., माँ का अखंड दीप जलाना......, ससुराल में शिवमंदिर पर करीब ११ पंडितों द्वारा महामृत्युंजय का जाप कराना..,...... पिता , पति , और पुत्रों के द्वारा किया गया प्रयास... कैसे मुझे जाने देते इस सुन्दर संसार से..! वो सभी स्नेहिल अनुभूतियाँ मेरे नेत्रों को आज भी सजल कर रहे हैं .... मैं उसे शब्दों में अभिव्यक्त नहीं कर पा रही...हूँ !
आज मुझे डॉक्टर भगवान , नर्स देवी , और स्कार्ट हार्ट हास्पिटल मंदिर लगता है..!