Sunday, 11 January 2015

श्वेत मन

श्वेत मन बेरंग सा चित्रण
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श्वेत मन, बेरंग सा.. चित्रण 
उसमें तुम अपना रंग भरकर 
सुन्दर चित्रण... कर जाते हो 
मुझे प्रीत में....छल जाते हो

खग सा चंचल हो जाता मन 
बिखरे लट आ गिरते मुख पर 
तब तुम दर्पण बन जाते ..हो 
मुझमें मुझको दिखलाते हो 

पथ में मेरे संग संग चलकर
बाधाओं को.. तोड़ निरन्तर
कालचक्र से लड़ . जाते हो
जड़ में चेतना भर जाते हो

अन्तर्तम में दीप .जलाकर
लाते हो नव विषय बनाकर
छन्द अलंकृत कर जाते हो
स्याही कलम में भर जाते हो
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© copyright Kiran singh

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