श्वेत मन बेरंग सा चित्रण
******************
श्वेत मन, बेरंग सा.. चित्रण
उसमें तुम अपना रंग भरकर
सुन्दर चित्रण... कर जाते हो
मुझे प्रीत में....छल जाते हो
खग सा चंचल हो जाता मन
बिखरे लट आ गिरते मुख पर
तब तुम दर्पण बन जाते ..हो
मुझमें मुझको दिखलाते हो
पथ में मेरे संग संग चलकर
बाधाओं को.. तोड़ निरन्तर
कालचक्र से लड़ . जाते हो
जड़ में चेतना भर जाते हो
अन्तर्तम में दीप .जलाकर
लाते हो नव विषय बनाकर
छन्द अलंकृत कर जाते हो
स्याही कलम में भर जाते हो
***********************
© copyright Kiran singh
No comments:
Post a Comment