वीणा वादिनी
बुद्धि प्रदायिनी
तमस ज्योतिर्मय कर दे
अंतस ज्ञान प्रकाश से भर दे
मैं मुर्खा
चंचल मति मेरी
साधना कैसे हो पूरी
देकर आशीष मेरे मन में
सतत साधना भर दे
अंतस ज्ञान प्रकाश से भर दे
स्वर होता
तुमसे मुखरित माँ
वीणा है झंकृत तुमसे माँ
नीरवता भरे इस जग को
संगीतमय कर दे
अंतस ज्ञान प्रकाश से भर दे
शब्दों का
मुझे ज्ञान नहीं है
अर्थों का पहचान नहीं है
शब्द अर्थ का मेल कराकर
लेखनी प्रवाहित कर दे
अंतस ज्ञान प्रकाश से भर दे
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©Copyright Kiran singh
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