मैं हूँ अग्नि
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मैं हूँ अग्नि
ऐ हवा
तुम संतुलित बहो
दिये में बाती बनो
जलूंगी
करूंगी मैं
आँगन , घर , बाहर
रौशन
ऐ हवा
तुम धीरे बहो
आंधियों में
जल जायेंगे
मेरी लौ से यदि
किसी का घर
फिर
दोषी होगे तुम
मत खेलना मुझसे
कहीं मुझे
खाक करते करते
राख न हो जाए
तुम्हारा
सम्पूर्ण
अस्तित्व
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©Copyright Kiran singh
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