!!!!!!!!!!!!!!! उलझन !!!!!!!!!!!!!!!!!
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एक शहर में सावन बरसे दूसरे में है तपन
किस शहर में मैं रहूँ उलझन में है मन
एक शहर में कामना तो दूसरे में है समर्पण
एक शहर में ज्योति है तो दूसरे में जीवन
विवश हो बढ़ चले कदम एक शहर की ओर
दूसरा शहर है खींचे मेरे मन की डोर
एक शहर में है मुझे ज्योति अभी जलाना
दूसरे शहर में है जिंदगी सजाना
प्रश्न कर रहा मेरा मन , मैं बढू किस ओर
कैसे दे उत्तर हृदय किस पथ को दे छोड़
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© copyright @ Kiran singh
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