सुप्त चेतना जागरण के लिए कलम चलती रहेगी लक्ष्य की तरफ वो अपने , निरन्तर बढ़ती रहेगी अवरोधक बिछे ज्यों कंटक. पांव चूमते अगर हैं रक्त में ही डूबकर नए छन्द , कलम गढ़ती रहेगी *********************** ©Copyright Kiran singh
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