Friday, 13 February 2015

जीवन के गीतों में

जीवन के गीतों के

जीवन के गीतो के
आरोह और अवरोहों में
मेरा समर्पण
पकड़
चल रही सांसों की
सरगम निरन्तर
सुन्दर

तुम्हारे मन्द्र सप्तक के
स्वर
मेरे तार सप्तक के स्वरों से
मिलकर
मध्य सप्तक को पकड़
गढ़ जाते हैं राग एक
सुन्दर

खनक कंगन
छनक पायल
तोड़ तुम्हारे नींद निशा में
भर श्रॄंगार रस
लिखा काव्य
मन से गढ़
सुन्दर

कुछ तुम कहकर
कुछ हम सहकार
प्रेम का समन्वय यह
जीवन
चल रहा है
बहती सरिता सी
छल छल
निर्मल
सुन्दर
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© copyright @ Kiran singh

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