आया सावन बहका बहका
बीत गए दिन रैन तपन .के
आया सावन बहका बहका
हरी चूनरी ओढ़.धरा.....ने
मुख पर ......घूंघट.लटका
आया सावन बहका बहका
इन्द्रधनुष ने बाण चलाया
सतरंगी रंग ......छलका
बदरी बीच झांकता रवि का
मुख मण्डल भी .....दमका
आया सावन बहका बहका
इठलाती ....पवन पुरवैया
संग लेकर रिमझिम बरखा
सोंधी मिट्टी के खुशबू .से
बन उपवन भी .....महका
आया सावन बहका बहका
हरी चूड़ियां खनक रही हैं
पैरों का पायल ...छनका
चलो सखी झूला झूलन को
मेरा भी मन ........बहका
आया सावन बहका बहका ...........किरण सिंह
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