लेकर स्मृतियों को मन में
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चलो पथिक निज पथ में
लेकर स्मृतियों को मन में
पलकों में सुन्दर स्वप्न लिए
मन में कर अपने प्रण लिए
विश्वास दिये को कर प्रज्वलित
प्रकाश लिए तम घन में
लेकर स्मृतियों को मन में
बहुत पथिक पथ में मिलेंगे
कुछ दर्द तो कुछ हमदर्द बनेंगे
नयनों में बस जाता केई
कोई ओझल हो जाता क्षण में
लेकर स्मृतियों को मन में
उर राज करे मल्लिका सी
मुख बन्द किए कलिका सी
खिल जाते मन भाव कुमुद
देखते नयन दर्पण में
लेकर स्मृतियों को मन में
उर भाव जुड़े कविता की तरह
बहे निर्झर सरिता की तरह
लहर लेखनी चूम कदम
फहराती सत्य ध्वज रण में
लेकर स्मृतियों को मन में
लेकर स्मृतियों को मन में
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copyright Kiran singh
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