Sunday, 30 November 2014

घनघोर घटाएं

!!!!! घनघोर घटाएं!!!!!
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घिर आई घनघोर घटाएं
कजरी गाने लगी हवाएं
रिमझिम बूँदें बरसने लगी
तोड़ कर सभी वर्जनाएं

झूम झूम और चूम चूम
नृत्य करने लगी लताएं
भूल कर तपती दोपहरी
शीतलहर की यातनाएं

पता है उन्हें सुख दुख के
आने जाने की परम्पराएं
बहुत रखा है धीर धरा ने
आस किरण मन में उगाए

चलो हम प्रकृति से सीखें
सकारात्मक कुछ कलाएं
और जी लें जिन्दगी को
भूलकर अपनी  ब्यथाएं
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© copyright @ Kiran singh

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