हे श्याम सलोने आओ जी
अब तो तुम दरस दिखाओ जी
आओ मधु वन में मुरलीधर
प्रीत की बंशी बजाओ जी
चीख रही है द्रौपदी फिर से
अस्मत चीर बचाओ जी
अज्ञानी हम सब मूरख हैं
गीता का पाठ पढ़ाओ जी
राग द्वेष से मुक्त करो हमें
अपना रूप दिखाओ जी
लो जन्म कि कहे यशोदा
सखियाँ सोहर गाओ जी
©किरण सिंह
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