Wednesday, 13 August 2014

स्वतंत्रता क्या मिली

जय विज्ञान

स्वतंत्रता मिली है
अभिव्यक्ति की
फिर कोई क्यों न निकाले
बाल की खाल
किसी व्यक्ति की

महा ज्ञानी हैं सभी
फिर क्यों किसी की सुने कभी 
आसां है इल्जाम मढ़ना
क्यों फिक्र अंजाम का
करना
समझकर भी
नासमझ बन बैठे हैं सब
षडयंत्र को

दोषारोपण ही एक तरीका है
कि सिस्टम
बहुत खराब है
चिन्ता तो बस यही है कि
कौन लायेगा
दुरूस्त करने के लिए
किसी
यन्त्र को

क्या भ्रष्टाचार स्वयं
चली आई  ?
या हमने  आमन्त्रण
भिजवाई  ?
सोचना होगा सीखना होगा
इसे
खत्म करने वाले
मूल
मन्त्र को

जय जय जय हो
विज्ञान
निकल पड़े हैं वैज्ञानिक
करने कुछ नया
अनुसंधान
रोबोट ही दुरुस्त करेगा
शायद
प्रशासन
तंत्र को
.................................
©copyright Kiran singh

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