!!!!मुझे गर्व है !!!!
मुझे गर्व है
अपनी समॄद्ध संस्कृति ,सभ्यता
एवं रिती रिवाजों पर
किन्तु
जब परंपराओं में बांधकर
धनधान्य के साथ
पिता ने जब किया था
मेरा दान
तब
निकल आए थे नेत्रों से मेरे प्राण
पिघल कर
पूछना चाहते थे रूंधे
स्वर
क्या गुनाह करती हैं
बेटियाँ
कि कर दिया जाता है
कन्या दान
तब याद आया दादी का वो
कथन
कि क्यों कहती थीं
वो
कि बेटियों होती हैं पराया
धन
..................................
किरण सिंह
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