Saturday, 23 August 2014

हॄदय में पीर

हृदय मे पीर,
  नयन सजल,
ऑखो मे था अंधियारा !
      सपने चकनाचूर हुए थे ,
मन अपना था हारा !
   बुझे दीप थे ,
अंतरतम के !
  चिंगारी बना सहारा,
और हमने दीप जलाया !...........किरण सिंह

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