हृदय मे पीर, नयन सजल, ऑखो मे था अंधियारा ! सपने चकनाचूर हुए थे , मन अपना था हारा ! बुझे दीप थे , अंतरतम के ! चिंगारी बना सहारा, और हमने दीप जलाया !...........किरण सिंह
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