इच्छाओं के वश में
चल रही है आत्मा
भटक रहा है मन
भौरों सा चंचल
साधनाओं को तोड़ती
कामना
चला जा रहा जीवन
कस्ती की तरह
पार करने की
ललक
और डूब जाने का
भय
तब उसको याद कर
करते हैं नमन
और कहते हैं
पार लगाओ
हे ईश्वर...................किरण सिंह
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