स्वतंत्रता क्या मिली
अभिव्यक्ति की
जिसे देखो वहीं दोष
देने लगे हैं
तंत्र को
अचम्भा तो तब होता है
जब इल्जाम
मढ़ने वाले ही
अंजाम देतें हैं
षडयंत्र को
आदत सी बन गई है
दोषारोपण की
कहते हैं सिस्टम
बहुत खराब है
फिर लाओ
दुरूस्त करने वाले
किसी
यन्त्र को
क्या भ्रष्टाचार स्वयं
चली आई ?
या आपने आमन्त्रण
भिजवाई ?
सोचो
और सीखो इसे
खत्म करने वाले
महा
मन्त्र को.........................किरण सिंह
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