Monday, 27 October 2014

जीवन पथ


!!!!! !!जीवन पथ !!!!!!!
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मन कौतूहल प्रश्न निरुत्तर
जीवन एक पहेली है
कौन पढ़ेगा उसका लिखा
जो लिखा लेख हथेली है

डोर उसके हांथों में है
उडाता जैसे तितली है
हम तो दुनियां रंगमंच पर
करते नर्तन कठपुतली हैं

जीवन पथ रहस्यमय है
क्षण क्षण इसपर शंशय है
लक्ष्य सबका एक मगर
अलग अलग समन्वय है

जीवन एक नदी सी है
पार करना कुशल नीति है
खेता माझी जीवन कस्ती
कर्मयोग ही विश्व रीति है

कैसा विधि विधाता का है
सब करता अपने मन का है
विन पूछे आते सब जग में
और बिन आज्ञा के जाता है
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© copyright @ Kiran singh

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