Sunday, 12 October 2014

मधु बालाएँ

बार बालाएं
*******************
आँखों में छुपी अश्रुधार लिए
होठों पर कृत्रिम मुस्कान लिए
रक्त रिस रहे ....... पांवो से
बजती घूंघरू छनकार लिए

किसी की वो भी ....बेटीहैं
जिसे गुमनाम.... कहते हो
किसी की बहन भी.. है वो
जिसे बदनाम..... करते हो

वो तो आहे .........हैं उनकी
जिसे तुम गीत ......कहते हो
तड़प कर .......छटपटाती हैं
जिसे तुम नृत्य .....कहते हो

आँखों में साफ... दिखता है
उनकी भाव....... भंगिमाएं
क्यों नहीं दिखता किसी को
कितनी मजबूर मधु बालाएं
***********************
© Copyright Kiran singh

No comments:

Post a Comment