Tuesday, 28 October 2014

दीप जलाना है

!!! दीप जलाना तुझे !!!
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भेद तम कर उज्ज्वल मन
लक्ष्य को पाना है
हर अंधेरे रास्तों में
दीप जलाना है

सुना है पत्थर भी पिघलकर
मोम बनते हैं
दुश्मन भी कभी मिलकर
दोस्त बनते हैं

इस नदी सी जिन्दगी के
लहरों संग बहना ही है
डूबकर या तैर कर
पार करना ही है
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© copyright Kiran singh

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