Thursday, 9 October 2014

आखिर में

आखिर में
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कितनी देर तक
छुपा पाएगा
मूर्ख बादल
दमकते रवि को
और
चमकते शशि को
आखिर में बादल
बरसकर
छट ही जाएगा
किरणें
विखर ही जाएंगी
चाँदनी
फैल ही
जाएँगी
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© copyright Kiran singh

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