Thursday, 16 October 2014

पत्र

!!!!!! पत्र !!!!!
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भावनाओं को दे आकार 
जो थे हृदय के उद्गार 
लिखा पत्र पिया को मैंने
नयनो से काजल ले उधार 

  उनकी स्मृतियाँ आधार
  करती खुशियों का संचार
  मधुर संगीत गूँज उठी उर
  छलके पलकों से अश्रुधार
 
   हृदय की ध्वनि देती ताल 
   सुर थी पायल की झनकार
    निशा मध्य कंगन खनकार
    गढता जो  नित सुन्दर राग
   
   अक्षरों को शब्दों में ढाल
    शब्दों में भर रस अलंकार
    कह न सकी जो सम्मुख उनके
    भेज दिया चिट्ठी संग प्यार
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   © copyright Kiran singh

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