Friday, 10 October 2014

आसमाँ से चाँद

आसमाँ से चाँद
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आसमाँ से चाँद फिर
लगा रहा है कक्षा
देना है आज हमें
धैर्य की परीक्षा

सोलह श्रॄंगार कर
व्रत उपवास कर
साक्षी तू प्रेम का
देना है तुझे अर्घ

उग आना जल्द आज
कर देना पूरी माँग
बड़ी हठी हैं हम
वर दो रहे अखंड सौभाग्य
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© copyright Kiran singh

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