श्वेत मन बेरंग सा चित्रण
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श्वेत मन, बेरंग सा.. चित्रण
उसमें तुम अपना रंग भरकर
सुन्दर चित्रण कर जाते हो
मन भावों से भर जाते हो
खग सा चंचल हो जाता मन
बिखरे लट आ गिरते मुख पर
तब तुम दर्पण बन जाते ..हो
मुझमें मुझको ही दिखलाते हो
पथ में मेरे संग संग चलकर
बाधाओं को.. तोड़ निरन्तर
कालचक्र से लड़ . जाते हो
मुझे लक्ष्य तक .पहुँचाते हो
अन्तर्तम में दीप ....जलाकर
क्लेश रहित नित प्रेम सजाकर
मन उज्ज्वल. तुम कर जाते हो
जीवन साकार तुम कर जाते हो
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© copyright Kiran singh
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