Wednesday, 15 October 2014

श्वेत मन

श्वेत मन बेरंग सा चित्रण
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श्वेत मन, बेरंग सा.. चित्रण 
उसमें तुम अपना रंग भरकर 
सुन्दर चित्रण कर जाते हो 
मन भावों से भर जाते हो 

खग सा चंचल हो जाता मन 
बिखरे लट आ गिरते मुख पर 
तब तुम दर्पण बन जाते ..हो 
मुझमें मुझको ही दिखलाते हो 

पथ में मेरे संग संग चलकर
बाधाओं को.. तोड़ निरन्तर
कालचक्र से लड़ . जाते हो
मुझे लक्ष्य तक .पहुँचाते हो

अन्तर्तम में दीप ....जलाकर 
क्लेश रहित नित प्रेम सजाकर 
मन उज्ज्वल. तुम कर जाते हो
जीवन साकार तुम कर जाते हो
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© copyright Kiran singh

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