Monday, 27 October 2014

सो गई हँसते हँसते

चली गई हँसते हँसते
***************
पहनी लाल नई चूनरिया
मांग सिंदूरी भरी सुहागन
लाल सजी माथे पर बिंदिया
चूड़ी हाथों में मनभावन

सजी पालकी द्वार खड़ी है
लेने द्वार आ गये साजन
रो रही हैं सखियाँ सहेली
गोरी छोड़ चली घर आँगन

अन्त हो गया उसके जीवन का
थक गई थी चलते चलते
हर खुशियाँ लाती थी लेकर
चली गई हंसते हंसते

खुश किस्मत वो सदासुहागन
रो रोकर सब कहते हैं
कितने छोडे स्वप्न अधूरे
सभी कहानी कहते हैं
************************
© copyright Kiran singh

No comments:

Post a Comment