!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! अन्तिम वार्तालाप !!!!!!!!!!!!!!!!!!!
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शाम को करीब सात बज रहा था , मैं अपनी सहेली के गृह प्रवेश में जाने के लिए तैयार हो रही थी .....तभी मेरी बहन रागिनी का मेरे मोवाइल पर काल आता है ..पापा से बात कर लो वो तुमसेबात करना चाहते हैं ! मैंने पापा का नम्बर डायल किया...... उधर से पापा का भावुक स्वर सुनाई देता है जिसे मैं उनके मुख से पहली बार सुन रही थी क्यों कि इतना भावुक होकर कभी बात ही नहीं किए थे !
पापा कह रहे थे- का जाने काहे आज तोहरा से बतियावे के बड़ा मन करत रहे ( पता नहीं क्यों तुमसे बात करने का बड़ा मन हो रहा था ! )
मैंने कहा - प्रणाम
पापा - बंटी ( मेरा भाई , पापा का इकलौता पुत्र ) के त ज्ञान हो गईल बा , जेकरा ज्ञान हो जाला ओकरा मोहमाया ना रहेला आ जेकरा परमानन्द के प्राप्ति हो जाला ओकरा दुनिया से मोह माया ना रहेला ..एसे हम सोचतानी कि बंटी के सबकुछ देके कतहूँ चल जाईं ! ( बंटी को तो ज्ञान हो गया है जिसको ज्ञान हो जाता है उसे मोह माया नहीं रहता है और जिसको परमानन्द की प्राप्ति हो जाती है उसे दुनिया से मोहमाया नहीं रहता है...इसलिए मैं भी सोच रहा हूँ कि सबकुछ बंटी को देकर कहीं चला जाऊँ )
मैं सोंच में पड़ गई कि आखिर पापा ऐसा क्यों कह रहे हैं मुझे लगा शायद बंटी उसबार रक्षाबंधन में लखनऊ से बलिया नहीं आ रहा था और पापा को उससे मिलने का मन कर रहा होगा इसी लिए ऐसा कह रहे हैं !
फिर मैंने कहा कि आपको बंटी से मिलने का मन है तो उसे बुला लीजिए ....नहीं तो कहिए मैं ही कह देती हूँ और मुझसे बात करने का मन है तो आ जाइए पटना ही !........तब पापा ने कहा एक शर्त पर मैं पटना आऊँगा.......कि तुम बंटी को भी पटना बुलाओगी......तब मैने कहा बलिया क्यों नहीं बंटी को बुला लेते.......तब उन्होंने झुंझलाकर कहा तुम नहीं समझोगी..... तुम बंटी को पटना बुलाओ.......तभी मेरी अम्मा पापा से फोन लेकर मुझसे कहती हैं अब फोन रखो तब से बंटी को चाटे और अब तुम्हें............ फिर फोन रख देती हैं ! और मैं तैयार होने लगी पार्टी में जाने के लिए !
सुबह मैं बलिया माँ से पापा के बारे में बात करने की कोशिश भी की पर अम्मा जल्दी में थी और थोड़ा बात करके फोन रख दीं
शाम को करीब पांच बज रहा होगा.. मैं बालकनी में गई तो मेरे पति की आवाज़ सुनाई पडती है ...मेरे ससुर जी गिर गए हैं किस नर्सिंग होम में ले जाना ठीक रहेगा ........फिर मैं बलिया काल करती हूँ और उधर से मेरे भतीजे की रोते हुए आवाज़ आती है नाना जी गिर गए हैं !
मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई और मै आवाक .......जैसे ही मेरे पति घर में प्रवेश करते हैं मैंने कहा
मुझसे कुछ छुपाने की जरूरत नहीं है और मैंने पापा से बातचीत के प्रसंग को सुनाया........और समझ आने लगा कि पापा बंटी को पटना बुलाने की बात क्यों कर रहे थे ........मैंने बंटी एवं सभी बहनों को भी सारी बातें बताई और सभी जैसे तैसे पटना आने के लिए चल दिए !
पापा अचेतन अवस्था में पटना आए लेकिन किसी से बात नहीं कर पाए ....डाक्टर बताया कि ब्लडप्रेशर हाई हो गया था जिससे ब्रेन का नस फट गया है बचने का उम्मीद नहीं है फिर भी वेन्टीलेटर पर करीब चौबीस घंटा रखा जबतक उनकी सांसें चल रही थीं और फिर ईश्वर की मर्जी के सामने चलती किसकी है.............. ?
सचमुच बंटी के लिए सबकुछ छोड़ कहीं चले गए ....शान्ति का भाव स्पष्ट दिख रहा था..... परमानन्द की प्राप्ति हो गई थी उन्हें ....नहीं था उन्हें दुनियाँ से मोह माया ! उनके कहे एक एक शब्दों का अर्थ समझने लगी थी मैं............ तब और भी स्पष्ट हो गया जब मैं बलिया गई और मकान के बाहर के नेमप्लेट पर मेरे भाई का नाम लिखा था जिसपर पापा ने अपना नाम मिटाकर बंटी का नाम छपवाया था !
आज भी मेरे मन में यह प्रश्न बार बार उठता है कि क्या दुनियां से जाने वालों को पहले ही ज्ञान हो जाता है
उनसे हुई मेरी अन्तिम वार्तालाप शायद अन्तिम दीक्षा थी !
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किरण सिंह
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