Thursday, 16 October 2014

जीवन में रफ्तार आ गया

जीवन में रफ्तार आ गया
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जीवन में रफ्तार आ गया
मुट्ठी में .संसार आ गया
वर्ण अक्षर छन्दों में सजगए
भावों का सैलाब आ गया

पतझड़ में मधुमास आ गया
रचना में अनुप्रास आ गया
ठहरी हुई .......लेखनी के
छन्द में रस श्रॄंगार आ गया

गर्मी मे वर्षात .....आ गया 
गीतों मे सुर ताल .आ गया 
बज उठी वीणा के .सरगम
जैसे उसमें प्राण ..आ गया 

दोपहरी मे ..छाँव आ गया 
बूँद लिए ..फुहार आ गया 
विन सावन के वर्षोंतो ..मे 
भीगना भी ..रास आ गया 
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© copyright @ Kiran singh

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