जीवन में रफ्तार आ गया
******************
जीवन में रफ्तार आ गया
मुट्ठी में .संसार आ गया
वर्ण अक्षर छन्दों में सजगए
भावों का सैलाब आ गया
पतझड़ में मधुमास आ गया
रचना में अनुप्रास आ गया
ठहरी हुई .......लेखनी के
छन्द में रस श्रॄंगार आ गया
गर्मी मे वर्षात .....आ गया
गीतों मे सुर ताल .आ गया
बज उठी वीणा के .सरगम
जैसे उसमें प्राण ..आ गया
दोपहरी मे ..छाँव आ गया
बूँद लिए ..फुहार आ गया
विन सावन के वर्षोंतो ..मे
भीगना भी ..रास आ गया
***********;;*;****
© copyright @ Kiran singh
No comments:
Post a Comment