Friday, 17 October 2014

स्तुति

!!!!!!!! स्तुति !!!!!!!!
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हृदय धरा पर प्रेम कलश 
कर क्लेशों का तर्पण
श्रद्धा के पुष्प कमल 
विश्वास चरण मे अर्पण 

मन को कर उज्ज्वल
ज्ञान दीप जलाकर
विश्व में हो मंगल
सुख समॄद्धि हो घर घर

हे शक्ति हमें दो वर
धीर धरे चंचल मन
दुखों के अग्नि में भी जलकर
चमके वह जैसे कुन्दन
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© copyright Kiran singh

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