Thursday, 25 September 2014

प्रार्थना

प्रार्थना !!

हे रणचण्डी
शक्ति वर्धिनी
दुख निवारिणी
सुख प्रदायिनी
खुश होकर अब वर दो
खुशियों से आँचल भर दो

चंचल चित और
मन लोभी है
साधना नहीं होती है
मेरे मन की डोर खींच
पथ प्रदर्शित कर दो
खुशियों से आँचल भर दो

भिक्षुणी मैं तेरे
दर आई हूँ
मन में कुछ कर
प्रण आई हूँ
पावन कर कलुषित मन को
दिव्य प्रकाशमय कर दो
खुशियों से आँचल भर दो

तुम तो जननी
की जननी हो
मनोकामना
पूर्ण करती हो
सकल क्लेश को हरकर
जग में शान्ति स्थापना कर दो
खुशियों से आँचल भर दो
…………………………………………
© copyright Kiran singh

No comments:

Post a Comment