!! दीप जलाया !!
हृदय मे पीर, नयन सजल, ऑखो मे था अंधियारा सपने चकनाचूर हुए थे मन अपना था हारा बुझे दीप थे अंतरतम के चिंगारी बना सहारा, और हमने दीप जलाया ………………………………………...... © copyright @ Kiran singh
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