Tuesday, 23 September 2014

कहानियाँ

कहानियाँ !!!!

कहानियाँ बहुत हैं
मेरी जिन्दगी के
कर रही हूं
स्मरण
जिन्हें मैंने
डायरी के पन्नों पर
लिखे थे
बेच दिए गए
जिन्हें
कचरे के साथ
जिनमें अंकित थे
मेरे अनेकों
भाव
कभी कस्ती बनाकर
बहा दी जाती
सपनों को
और कभी फाड़कर
उड़ा दी जाती
मेरे भावनाओं की
खिल्ली
तब तुम
कहां थे
………………………………….....
©copyright Kiran singh

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