देखो सखि ऋतु राज आ गया
हमें नया अंदाज़ आ गया
धरा पहन ली पीली चूनर
रूप देखकर नाज़ आ गया
कोयल कूके फाग आ गया
गीतों मे अनुराग आ गया
झनक उठी वीणा सी प्रकृति
स्वर को अनुपम राग आ गया
उमड़ हृदय में प्यार आ गया
मुट्ठी में .संसार आ गया
वर्ण अक्षर छन्दों में सज गए
फिर लिखना शृंगार आ गया
मन में नव उल्लास आ गया
नव विचार कुछ खास आ गया
लिख दी मैंने ग़ज़ल - गीत फिर,
लक्ष्य हमारे पास आ गया
©किरण सिंह
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