Monday, 8 September 2014

मुस्कानों में छुपी

!!! मुस्कानों में छुपी !!!

मुस्कानो में ...छुपी हुई
वेदना को व्यक्त कर दूँ 
भावनाओं को पिरोकर 
छन्द में अभिव्यक्त कर दूँ 

चेतना जड़ में जगाकर 
संवेदना ..स्पंद कर दूँ 
सृष्टि के ...सौन्दर्य को 
शब्द में अनुबंध कर दूँ 

मूक हॄदय में पीर रूके हैं
सस्वर उसे सशक्त कर दूं
मुस्कानों में .....छुपी हुई
वेदना को ...व्यक्त कर दूं

( किरण सिंह )

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