Thursday, 4 September 2014

जैसे ही

!!!!जैसे ही!!!!

जैसे ही नैहर की
चौकठ पर
रखा पांव
बड़े नेह से भौजाई
लिए खड़ी हांथो में
थाल
सजाकर
जुड़ा हमारा
हॄदय
खुशी से आया
नयन भर
हमने
दिया आषीश
मन भर
सजा रहे भाई का
आंगन
भरा रहे भाभी का
आँचल
रहे अखंड
सौभाग्य
हमारा
नैहर रहे
आबाद...............किरण सिंह

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