धूमिल है पर मिटे नहीं
स्मृतियों में चित्र चिन्हित
धूमिल हैं पर मिटे नहीं
उलझ गए पतंग के धागे
डोर अब तक कटे नहीं
अरसे बाद खुले हृदय के
पट अभी बंद हुए नहीं
राह देख थक नयन सो गए
सपने अब तक टूटे नहीं
कागज की कस्ती भी अब तक
तैर रहे पर डूबे नहीं
चाहे पथ में हो अंधेरा
दिये मन के बुझे नहीं
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© copyright @ Kiran singh
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