Tuesday, 16 September 2014

धूमिल हैं पर मिटे नहीं

धूमिल है पर मिटे नहीं

स्मृतियों में चित्र चिन्हित 
धूमिल हैं पर  मिटे नहीं 
उलझ गए पतंग के धागे 
डोर अब तक कटे नहीं 

अरसे बाद खुले हृदय के 
पट अभी बंद हुए नहीं 
राह देख थक नयन सो गए 
सपने अब तक टूटे नहीं

कागज की कस्ती भी अब तक 
तैर रहे पर  डूबे नहीं 
चाहे पथ में हो अंधेरा
दिये मन के बुझे नहीं
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© copyright @ Kiran singh

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