बढ़ चलो तुम पथिक लक्ष्य की ओर
भेद तम रास्तों के
दिया उम्मीद का जला
देखें जो सपने
हकीकत में दिखेंगे वो नींदों को तोड़
बढ चलो तुम पथिक लक्ष्य की ओर
चुभे हुए कंटकों के
पीर को परास्त कर
जय गीत तान छेड़
पथ में जो मिले पथिक उन्हें भी साथ जोड़
बढ़ चलो तुम पथिक लक्ष्य की ओर
पंक में कमल खिले
कंटकों में गुलाब
प्रेरणा लेकर उनसे
चलो सभी बाधाओं के भय को छोड़
बढ़ चलो तुम पथिक लक्ष्य की ओर
स्वप्न को स्वछन्द कर
हौसले बुलंद .कर
तोड़ बेडियों को दो
विजय की तरफ दो अपने कदमों को मोड
बढ़ चलो तुम पथिक लक्ष्य की ओर
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© copyright @ Kiran singh
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